मंदिर से मस्जिद की मीलों की मंज़िल ।

मंदिर मैं दाना चुग कर चिड़िया
मस्जिद में पानी पीती है ,

मैंने सुना है राधा की चुनरी 

कोई सलमा बेगम सीती है,

एक रफ़ी था महफ़िल महफ़िल 

रघुपति राघव गाता था ,

एक प्रेमचंद बच्चों को 

‘ईदगाह’ सुनाता था 

डॉ शरीफ़ हर शाम मंदिर के बहार 

मुफ़्त मैं खाना देते हैं ,

औरों को दिखते होंगे हिंदू और 

मुसलमान 

मुझे तो हर शकस के भीतर 

इंसान दिखायी देते हैं ।

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