प्यार की हार ।

इश्क़ है तो इश्क़ का इजहार होना चाहिये,

आपको चेहरे से भी बीमार होना चाहिए ।
ऐरे ग़ैरे लोग भी पढ़ने लगे हैं इन दिनो,

आपको इंसान नहीं अख़बार होना चाहिये।
ज़िंदगी कब तलक डर डर फिरायेगी हमें ,

टूटा फूटा ही सही घर बार होना चाहिये।
जब माँ का प्यार काले टीके में हो सकता है ,

तो हिजाब से क्यूँ ना हमें प्यार होना चाहिये।
हमने तो अल्लाह के प्यारों के भी पैर छुए हैं ,

फिर क्यूँ ना उनके दिल में थोड़ा ऐतबार होना चाहिए ।
ख़ैर ,

अपनी यादों से कहो एक दिन की छुट्टी दे मुझे ,

इश्क़ के हिस्से में भी इतवार होना चाहिये।

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